शिक्षक विधायक चुनाव के लिए भाजपा का आस्ते कदम

शिक्षक विधायक चुनाव के लिए भाजपा का आस्ते कदम
-उम्मीदवारों की संख्या अधिक
प्रतिनिधी
नागपुर : स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। एक समय नितिन गडकरी के नेतृत्व वाला स्नातक निर्वाचन क्षेत्र भाजपा का गढ़ था। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने अभिजीत वंजारी को मैदान में उतारा था और बीजेपी के गढ़ को तोड़ा था। अब शिक्षक विधायक चुनाव की घंटी बजी है। इसके लिए करीब आधा दर्जन अभ्यर्थी हैं। ऐसे में उम्मीदवारों के चयन में बीजेपी को बड़ा सिरदर्द होने वाला है। इसमें बगावत की आशंका को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की पुनरावृत्ति से बचने के लिए सतर्क रुख अपनाया है।

प्रदेश उपाध्यक्ष संजय भिंडे का नाम इस समय भाजपा के लिए सबसे आगे है। पूर्व विधायक अनिल सोले के समर्थकों ने पुरजोर मांग की है कि ग्रेजुएशन में उनके साथ हुए अन्याय के कारण उन्हें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के माध्यम से स्थान दिया जाए। दक्षिण नागपुर के पूर्व विधायक सुधाकर कोहले की नाराजगी को भी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। विधायक नागोराव गाणार का इंतजार हमेशा की तरह जारी है। उनके कट्टर समर्थकों का दावा है कि किसी भी नाम पर आम सहमति नहीं होगी। उधर, राजू कनाटे ने सभी को स्पष्ट कर दिया कि वह यह कहकर अपनी उम्मीदवारी दाखिल करेंगे कि वह कितने दिनों तक नेताओं को फॉलो करेंगे। उन्होंने अपना एक अभियान दौरा भी पूरा कर लिया है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पूर्व विधायक अनिल सोले को भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह अपना उम्मीदवारी दाखिल करेंगे। पूर्व महापौर और वर्तमान में विश्वविद्यालय की राजनीति में सक्रिय कल्पना पांडे भी मैदान में हैं। हमेशा की तरह योगेश बन का दावा अब भी कायम है। चूंकि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की बागडोर संभाली है, इसलिए उनका पक्ष उम्मीदवार के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसलिए मुकाबले में कई बड़े नामों के कटने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अब राज्य में राजनीति पर ज्यादा ध्यान नहीं देने का फैसला किया है। इससे उनके समर्थकों को परेशानी हो सकती है।

इस निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा समर्थक विधायक नागोराव गाणार को दो बार निर्वाचित हुए हैं। भाजपा को इस बात का पूरा ध्यान रखना होगा कि आपसी मतभेद के कारण यह निर्वाचन क्षेत्र खो न जाए। इसलिए भाजपा के सामने उम्मीदवार देते समय गुटबाजी से बचने की बड़ी चुनौती है।