नागपूर में संघ के पथसंचलन में सरसंघचालक मोहन भागवत बोले

नागपूर में संघ के पथसंचलन में सरसंघचालक मोहन भागवत बोले
-महिलाओं के बिना समाज की पूर्ण शक्ति का उदय नहीं
प्रतिनिधी
नागपूर : डॉ. हेडगेवार के समय से ही आरएसएस के कार्यक्रम में महिलाएं शामिल रही हैं। अनसूया काले से कई महिलाओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रमों में भाग लिया। हम आधी आबादी को गरिमा और निष्पक्ष भागीदारी देना चाहते हैं। ‘मनुष्य जो कुछ भी कर सकता है, सभी कार्य मातृ शक्ति से ही हो सकते हैं। लेकिन पुरुष वो सब काम नहीं कर सकते जो महिलाएं कर सकती हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने यह मत व्यक्त किया है कि महिलाओं के बिना समाज की पूर्ण शक्ति का उदय नहीं हो सकता। वे नागपुर में आयोजित दशहरा मेले का मार्गदर्शन करते हुए बोल रहे थे। सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से, मीडिया के माध्यम से, नेताओं के माध्यम से, बच्चों को मूल्य प्राप्त होते हैं। संस्कार केवल महाविद्यालयों से ही प्राप्त नहीं होते। केवल स्कूली शिक्षा पर निर्भर न रहें। इसका सबसे ज्यादा असर घर के माहौल, समाज के माहौल पर पड़ता है। नई शिक्षा नीति के बारे में बहुत चर्चा है, लेकिन क्या आप अपनी भाषा में पढ़ना चाहते हैं? एक भ्रम है कि अंग्रेजी रोजगार की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि हकीकत में ऐसा नहीं है।

लगातार हमारे बीच दूरियां बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे देश में दहशत का माहौल बनाया जा रहा है। किसी को कोई भय और अनुशासन न हो, इसके लिए हमेशा प्रयास किए जा रहे हैं। वे आपके करीब रहने की कोशिश करते हैं क्योंकि वे आप तक पहुंचने में सक्षम होना चाहते हैं। यह संप्रदाय, जाति के नाम पर अपने हितों से संबंधित होने का दिखावा करता है। दरअसल वे अपने स्वार्थ के लिए हमारे करीब आते हैं। इसके जरिए मोहन भागवत ने इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पीएफआई के खिलाफ की गई कार्रवाई की ओर ध्यान खींचा। ‘समाज को चल रही कार्रवाइयों में भोलेपन से नहीं फंसना चाहिए।’ उन्होंने इस बार भी अपील की थी।

-समय की जरूरत के हिसाब से बदलाव जरूरी
कोरोना संकट से बाहर आने के बाद हमारी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। दुनिया भर के विशेषज्ञ राय व्यक्त कर रहे हैं कि भविष्य में भी आर्थिक उछाल जारी रहेगा। देश में खेल क्षेत्र में भी काफी हद तक सुधार हुआ है। हमें अपने देश के खिलाड़ियों पर गर्व है। अगर हमें आगे बढ़ना है तो सबसे पहले हमें खुद को जानना होगा। अगर हम जरूरत को नहीं पहचानेंगे और इसे अपने आप में नहीं करेंगे, तो यह हमारी प्रगति में एक बड़ी बाधा होगी।