देश विरोधी काम करने वाले हिंदू संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं ?
-सपा विधायक अबू आजमी की टिपणी
पॉलिटिकल ब्युरो
मुंबई: सपा विधायक अबू आजमी ने PFI पर प्रतिबंध को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की
भूमिका में कहा की अगर कोई संगठन आतंकवादी है और सरकार के पास इसका पूरा सबूत है तो ऐसे संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, लेकिन देश विरोधी काम करने वाले हिंदू संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया गया।
समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आजमी ने भी अब पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध पर अपना रुख स्पष्ट किया है। उनसे पहले एमआईएम सांसद इम्तियाज जलील भी इस मुद्दे पर अपनी राय रख चुके हैं। मेरा मानना है कि हमारे देश में कानून सबके लिए समान है। कानून में धर्म के आधार पर अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा, कोई भेदभाव नहीं है। अगर कोई संगठन आतंकवादी है और सरकार के पास इसका पूरा सबूत है तो ऐसे संगठन को प्रतिबंधित कर देना चाहिए। इस देश में रहने वाला कोई भी व्यक्ति जो देश के खिलाफ काम करता है उसे कैद या मौत की सजा दी जानी चाहिए। लेकिन कानून को लागू करते समय किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए, उन्होंने ऐसा स्पष्ट रुख व्यक्त किया है।
आजमी ने आगे कहा कि नांदेड़ में यशवंत शिंदे नाम के व्यक्ति ने अदालत में एक हलफनामा दायर कर कहा था कि जब वह आरएसएस से जुड़ा था, तो उसने देखा कि आरएसएस के लोग जम्मू-कश्मीर में बम बनाने और विस्फोट करने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। और जब मैंने देखा कि लोगों का खून बहाया गया और इस काम में जान चली गई, तो मैंने आरएसएस छोड़ दिया।
-धर्म संसद के नाम से ली गई थी
आजमी ने आगे कहा कि कुछ दिनों पहले एक वीडियो में कुछ लोगों ने हाथ उठाकर कसम खाई थी कि वे मुस्लिम समुदाय के 20 लाख लोगों को मार डालेंगे। यह शपथ धर्म संसद के नाम से ली गई थी। इसी तरह बीजेपी से जुड़े ध्रुव सक्सेना नाम के शख्स को सेना से जुड़ी जानकारियां आईएसआई को भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसलिए मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि संगठन चाहे मुस्लिम हो, हिंदू हो या कोई भी जाति धर्म, सभी के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए और प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। उपरोक्त उदाहरण देकर आजमी ने परोक्ष रूप से पूछा है कि देश के विरुद्ध कार्य करने वाले हिन्दू संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया गया।
-सिमी पर प्रतिबंध, कोर्ट में पुख्ता साबुत नहीं मिला
मुझे खुशी हुई जब स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर प्रतिबंध लगा दिया गया क्योंकि सिमी के लोग आतंकवादी गतिविधियों में शामिल पाए गए थे। लेकिन जब पूरा मामला दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गया तो उनके पास सिमी के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं था। यह अदालत के आदेश की 252 पन्नों की प्रति में कहा गया है। यह देश धर्मनिरपेक्ष है। यह देश हिंदुओं, मुसलमानों, सिखों, ईसाइयों का है। इसलिए किसी भी जाति धर्म के लोगों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। सपा विधायक आजमी ने पीएफआई पर प्रतिबंध के मुद्दे पर यह प्रतिक्रिया दी।


