दीक्षाभूमि विस्तार की 350 करोड़ की योजना खटाई में
-पूर्व सीएम फडणवीस ने की थी घोषणा
– ५० करोड़ की तुरंत धनराशि भी नहीं दी
प्रतिनिधी
नागपुर : देश भर में लाखों वंचितों, शोषितों और पीड़ितों के लिए ऊर्जा के स्थान के रूप में जानी जाने वाली दीक्षा भूमि के विस्तार के लिए 350 करोड़ की योजना तैयार की गई। एनआइटी के जरिय यह योजना का अम्ल होना था। लेकिन सरक़ार की उच्च स्तरीय समिति लगातार गलतियाँ कर रही है, इसलिए दीक्षा भूमि के विस्तार की राह कठिन हो गई है, ऐसा आरोप डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर स्मृति समिति के सचिव डॉ. सुधीर फुलजेले ने शनिवार (1 अक्टूबर) को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा।
तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दीक्षाभूमि के विस्तार के लिए 2015 में फंडिंग की घोषणा की थी। इसके लिए एनआइटी के जरिए 350 करोड़ का प्लान तैयार किया गया था। पहले चरण में 100 करोड़ की मंजूरी दी गई और 40 करोड़ की धनराशि तुरंत एनआइटी को हस्तांतरित की गई। एक निजी वास्तुकार के माध्यम से एनआइटी द्वारा तैयार की गई योजना में सामने में स्वास्थ्य विभाग के साथ क्वाटन रिसर्च सेंटर की साइट शामिल थी। हालांकि क्वाटन रिसर्च सेंटर के अधिकारियों ने इस जगह को देने पर बार-बार आपत्ति जताई। स्मारक समिति द्वारा योजना में कुछ संशोधन सुझाए जाने के बाद इसे अंतिम रूप देने के लिए शासन की उच्च स्तरीय समिति के पास भेजा गया। लेकिन, पिछले सात वर्षों में त्रुटि को दूर कर इसे उच्च स्तरीय समिति द्वारा वापस भेजा जा रहा है। उनकी त्रुटियां अभी पूरी नहीं हुई हैं। फुलजेले ने कहा कि यह उन्हें रोकने की कोशिश है।पहले चरण में 100 करोड़ की लागत अब 180 करोड़ हो गई है।
-अभी फडणवीस डिप्टी सीएम
यह घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की थी। अभी फडणवीस डिप्टी सीएम है । नागपुर उनका गृह क्षेत्र है। उन्होंने इस निधि के बारे में जोर देकर विकासनिधि देना चाहिये। घोषणा और अम्ल के बाद सात साल फंड देने को लगना यह ताज्जुब की बात है। यह मसले से अम्बेडकरी जनता में काफ़ी रोष है।


